रुक, तू मत जा, रुक, यूं मत जा, पल भर को सोच ज़रा ये किस तरफ जा रहा है तू इस तरह खुद को खो कर आखिर क्या पा रहा है तू ज़िंदगी के सफर की अभी शुरुआत ही कहाँ हुई है तेरे सपनों से अभी ढंग से तेरी बात भी कहाँ हुई है हारा थोड़ी सी जमीं तो क्या पूरा आसमान बाकी है हौंसलो के पंख फड़फड़ा, अभी लंबी उड़ान बाकी है मंजिलें हर किसी की यहां कभी एक सी नहीं होंगी हिम्मत से चलता जायेगा तो कभी बेबसी नहीं होगी मुसीबतों के आगे तू झुक मत जा रुक, तू मत जा, रुक यूं मत जा याद रख, बाप का गुरुर, मां की आंख का तारा है तू पहला दोस्त भाई बहन का, सबको बड़ा प्यारा है तू सोच कि तेरे लिए मुश्किलों में वो कब खड़े नहीं हुए गलतफहमी छोड़, उनके ख्वाब कभी तुझसे बड़े नहीं हुए हाँ उनकी ख्वाहिशों का अपने सपनो पे ना दबाव रख जो चाहता है वो कर, दिल खोल के सामने जवाब रख ना खुद को ख़त्म कर, ना अपने जूनून को मरने दे ज़मीं पर बेफिज़ूल न बहा, हौसलों में खून उतरने दे बहारें तो आनी है, अभी से तू सूख मत जा रुक, तू मत जा, रुक, यूं मत जा ये दुनिया है, यहां सब के तरक्की के पैमाने अलग है हर किसी की नजर में बुलंदी क...