वाह रे इंसान, गज़ब कमाल करता है तू,
गले में हार डाल कर हलाल करता है तू।
ताकतवर, बेईमान को तो हाथ जोड़ता फिरे,
शरीफ, कमज़ोर का हाल बेहाल करता है तू।
जरूरी नहीं खंजर से ही कत्ल करे किसी का,
जज्बातों के खून से भी हाथ लाल करता है तू।
खुशी बेहिसाब हो तो उसका शुक्र तक नहीं,
कुछ गम मिलें तो बड़ा बवाल करता है तू।
जज़्बात दूसरों के लगें महज़ खिलौने बराबर,
कोई तुझसे खेल जाए तो बड़ा मलाल करता है तू।
सौदे बाजी में ऐसा पक्का कि पहले मांगे खुदा से,
फिर बदले में चढ़ावे की रिश्वत की चाल चलता है तू।
जो मूंह तोड़ जवाब दे, उससे परहेज रखता है,
शराफत पर ही चालाकी का इस्तेमाल करता है तू।
खुद का गिरेहबान भी झाँक ले इक बार 'संदीप',
उंगली खुद पे भी उठेगी जैसे सवाल करता है तू।
–संदीप सिंह–

Very nice 👏👏
ReplyDeleteVery nice 👍
DeleteWah kamal really lovely. All the best
ReplyDeleteWaah kyaa baat hai maza aa gaya 👌👌😊 ye hui na baat 👍👍💯💯
ReplyDeleteकमाल कित्ता 👍👏👏👏
ReplyDeleteNice 👍
ReplyDeleteNice bro...👍👍
ReplyDeleteNice👌👌
ReplyDeleteGud bro..keep it up
ReplyDeleteVery nice.kamal ......
ReplyDeleteIncredible 👍
ReplyDeleteVery true
ReplyDeleteTotally nice
ReplyDeleteBahut badiya
ReplyDeletewaah janab waah
ReplyDeleteनिश्शब्द हूँ, प्रशंसा के लिए शब्द कम हैं।।।। God bless you & your poem.... चरैवेति चरैवेति ।। 🙏
ReplyDeleteसबका बहुत बहुत धन्यवाद
ReplyDeleteExcellent, brilliant, great.!!! Well done. Exposed the reality most of mankind have.
ReplyDeleteThank u mam
Deletefire
ReplyDeleteMaza aa gaya
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