हाथ छोटे मगर ज़िम्मेदारियां बड़ी निभा रहा है वो
छोटू नहीं, घर का बड़ा है, सबका बोझ उठा रहा है वो
पेन पेंसिल, गुब्बारे, खिलौने, जो बचपन सजाते है
ये बेशकीमती शौक बेबस होकर बेचे जा रहा है वो
सोचने का वक्त नहीं कि किस्मत चमकेगी या नहीं
अभी दो वक्त रोटी को जूठी थाली चमका रहा है वो
भूख के पास गिरवी रख आया वो बचपन अपना
खुद का आज बेच, छोटे का कल बचा रहा है वो
मां से प्यार, बाप से बेफिक्री, नसीब न हो सकी उसे
छोटे भाई-बहनों को मां बाप बनके दिखा रहा है वो
स्कूल भेजे उन्हें ताकि ज़िंदगी जीना सीख जाए
खुद जिंदगी से सीखने काम पर जा रहा है वो
छोटी उम्र में ही चुन लिया खुद्दारी का रास्ता
हट्टे कट्टे नाकारों को आइना दिखा रहा है वो
- संदीप सिंह-

🙏
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Delete🙏🙏🙏🙏
हमेशा की तरह..... ज़बरदस्त
ReplyDeleteAs Usual Zhakkas N
ReplyDeletePrecious 👌
ReplyDeleteHeart touching lines
ReplyDeleteVery true
DeleteJabardast
ReplyDeleteToo good
ReplyDeleteYrrr bohot acha likha h...seriously
ReplyDeleteHeart wrecking and touching
ReplyDeleteSeriously good
ReplyDeleteSuperb
ReplyDelete👍👍👌👌
ReplyDeleteWonderful
ReplyDeleteTrue lines
ReplyDeleteNic bro
ReplyDeleteबहुत बहुत शुक्रिया सबके साथ का
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