गम ज्यादा सताए तो खुदा के दर तो जरूर जाया करो,
पर हो सके तो एक चक्कर अस्पताल लगा आया करो,
किसी कमरे में नई जिंदगी तुम्हे जन्म लेती दिखेगी,
किसी बुजुर्ग की आखिरी सांसे जवाब देती दिखेगी,
कहीं कोई बेटा बीमार मां का ख्याल रख रहा होगा,
हमारे साथ ही क्यों? हर कोई सवाल कर रहा होगा,
कोई बाप बेसुध बेटे को बाहों में उठाए खड़ा होगा,
कोई इलाज की खातिर बेदर्द गरीबी से लड़ा होगा,
कोई आग में झुलसा, कोई सड़क हादसे का शिकार,
किसी को दिल का दौरा, कोई दर्द ए दिल का बीमार,
थका कैंसर से लड़ कर आखिरी घड़ियां गिन रहा कोई,
ना रात रात लगे उसको, ना उसका अब दिन रहा कोई,
खुदकुशी कर जिंदगी और मौत के बीच फंसा हुआ,
हर कोई मिलेगा दवाइयों के दलदल में धंसा हुआ,
शुक्र करो बोल सकते हो, कितने तो बेजुबान बैठे होंगे,
कई सुन ही न पाते होंगे, हर आवाज़ से अंजान बैठे होंगे,
रंग बिरंगी इस दुनिया में, कई बेरंग से जिए जा रहे है,
आंखे मिली पर रोशनी नहीं, बस अंधेरा पिए जा रहे है,
बिस्तर से लगे कई तो मर्जी से हिलने में भी लाचार होंगे,
ज़िंदगी एक कमरे में सिमटी, ठीक होने के न आसार होंगे,
नाम तक न सुना होगा जिनका ऐसे अजीब रोग देखोगे,
गम भूल जाओगे ’संदीप’, वहां ऐसे गमगीन लोग देखोगे,
दर्द को मरहम बनाने का ये नुस्खा आजमाया करो,
हो सके तो एक चक्कर अस्पताल लगा आया करो।
- संदीप सिंह -

Reality of life
ReplyDelete🙏🙏🙏
ReplyDeleteTrue
ReplyDeleteReality presented in wonderful style. Seeing more sufferings of others, alleviates our own pain. It is a truth . Sandeep you are so versatile. Dealing with so different themes in poetry is praiseworthy.keep it up.
ReplyDeleteThank u very very much Panjeta mam
DeleteReality. As We both have taken many rounds of Hospital. We know. 🙏🙏
Deleteहॉस्पिटल मे वो 15 दिन आँखों के आगे आ गए 😓😓 जीवन की सच्चाई जान नी हो तो एक चक्कर तो अस्पताल मे लगा आया करो 🙏🙏
ReplyDelete🙏🙏
DeleteTruly appreciable..
ReplyDeleteBilkul sahi likha Sandeep gi aapne
ReplyDelete🙏🙏🙏🙏
ReplyDeleteBitter truth of life
ReplyDeleteਬਹੁਤ ਖੂਬ ਮੇਰੇ ਵੀਰ ਚੰਗਾ ਲਿਖਾਰੀ ਬਣ ਗਿਆ 22 ਜੀ
ReplyDeleteJindgi ki sachhai ko bahut sundar likha
ReplyDeleteGod bless you
Zindagi ki sachchaee ko likha h apne shabdon m . Bahut khoob
ReplyDeleteबहुत बहुत धन्यवाद बड़े भाई डा. ओमपाल जी
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