काम बन भी जाए मगर मुकाम नहीं बना करते।
ईमान के मालिक हो तो तुमसे खास कोई नहीं,
किरदार बेच खास बनो, ऐसे आम नहीं बना करते।
कीमत प्यार हो तो मुफ्त में भी बिक जाओ मगर,
कागज़ के टुकड़े खरीद लें वो दाम नहीं बना करते।
सोच में आफताब हो तो उजाला जरूर बिखरेगा,
चमकती सुबह बन ऐ दोस्त, अंधेरी शाम नही बना करते।
कुछ दर्द जरूरी होते हैं ज़माने से छिपाने को,
हर दर्द छलक जाए वो जाम नहीं बना करते।
एक कलंक चंदन के सौ टीकों पे भारी होता है,
गुरूर बन किसी का, इल्जाम नही बना करते।
चमकना है गर सूरज सा तो तपिश सहनी पड़ेगी,
बुलंदी पर आसानी से कभी नाम नहीं बना करते।
दिल साफ रखो तो सब खुद-ब-खुद साफ़ दिखेगा,
आंखो पे चश्मा लगाने से बबूल आम नहीं बना करते।
ताकत में कुछ कम न थे बाली और रावण भी ’संदीप’,
पर चरित्र की ताकत बिना कोई राम नहीं बना करते।
–संदीप सिंह–
Very true 😊😊
ReplyDeleteFantabulous 👌
ReplyDelete👍👍
ReplyDeleteWoow brilliant. 👌
ReplyDeletetrue
ReplyDeleteWow ! Sir Heart Touching Lines ☺
ReplyDeleteराम बनो
ReplyDeleteSir Ji tusi great ho👏🏻👏🏻
ReplyDeleteआप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया
ReplyDeletewah ustad
ReplyDeleteExcellent, unique mind-blowing. Loved it
ReplyDelete✨️ you are 🌟 a star.
ReplyDelete👌👌
ReplyDeleteSir, I don't usually read poetry, but have to tell you this one was awesome....had to read and would thank Vanshika...that she shared it on her page....so got to hear it there
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