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वक़्त, बड़ा कमबख्त

जो वक़्त है ये, 

बड़ा ही सख़्त है ये,

बादशाह है बादशाहों का, 

किसी की सुनता नहीं, बड़ा कम्बख़्त है ये।

जो वक़्त है ये, 

बड़ा ही सख्त है ये...


कभी सदियों सा लम्बा, कभी ये लम्हा सा लगता है,

कभी महफिल बन आए, तो कभी तन्हा सा लगता है,

पंख नहीं है मगर फिर भी उड़ता ही जा रहा है,

उम्र बुजुर्गों सी कभी, तो कभी नन्हा सा लगता है,

खट्टे मीठे पलों के फलों से लदा एक दरख़्त है ये,

जो वक़्त है ये, 

बड़ा ही सख्त है ये...


अपनी मस्ती से चलता सबको पीछे छोड़ चुका है,

बड़े आए तीस मार खां, सबका गुरूर तोड़ चुका है,

जो तू लापरवाह हुआ तो ये भी बेपरवाह बहुत है,

उस्ताद है जनाब, अच्छे अच्छों के कान मरोड़ चुका है,

मगर जिसने जान ली, पहचान ली कीमत इसकी,

सिर पे बिठाए उसको, बस उसका ही भक्त है ये,

जो वक़्त है ये, 

बड़ा ही सख्त है ये,

बड़ा कमबख्त है ये...


- संदीप सिंह -

Comments

  1. these lines tell us moral value of time.
    Keep it up. 🙏

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  2. Fabulous sir fabulous

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  3. 🙏👍👍 very good al the best

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  4. This is wonderful... 👍

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  5. बहुत बहुत शुभकामनाएं और प्यार.... यूं ही लिखते रहिएगा.... मैं आपमें एक उभरता हुआ कवि और लेखक देख रहा हूँ। आप पर ईश्वर का आशीर्वाद हमेशा बना रहे।।

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  6. सबका बहुत बहुत धन्यवाद

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