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मेरे ख्यालात

कुछ बातों में आज भी पुराने ख्यालात रखता हूँ मैं,
कि जो दिल में है, जुबां पे भी वही बात रखता हूँ मैं।

फालतू की बातों से परहेज़ है बस और कुछ नहीं,
लोग सोचते हैं गुरूर है, जो कम बात करता हूँ मैं।

कौनसी बात, किसे बुरी लग जाए, क्या पता,
इसलिए बोलते वक्त थोड़ी एहतियात रखता हूँ मैं।

कोई जादूगर नहीं, सादा किसान का बेटा हूँ मगर,
चंद दानों से लाखों उगाने की करामात रखता हूँ मैं।

बड़ी गाड़ी बड़ा मकान बड़े ख्वाब हैं लेकिन,
पुराने मकान की तस्वीर बटुए में साथ रखता हूँ मैं।

लड़ने का शौक नहीं मगर कायर भी ना समझना मुझे,
जिंदगी से हर रोज़ से दो दो हाथ करता हूँ मैं।

महबूब सा बन कर मेरी, जवाब देती रहा कर बस,
ऐ जिंदगी! जब कभी भी तुझसे सवालात करता हूँ मैं।


- संदीप सिंह -

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