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नशे दा कहर - Tragic Story of Many Families (Hindi/Punjabi)



बड़ा हो गया कुवेला (देर रात), हले घर नइयों आया,

माड़े ओंदे ने ख्याल, जांदा दिल घबराया,

बैठा सारा परिवार, ओहदी उड़ीक करी जावे,

कित्थे-किवें होणा, पल-पल सोच मरी जावे।

        बूहा (दरवाजा) पिट्टया किसे ने, बाहरों आवाज इक छड्डी, 

        ''ओ कोई खोलो दरवाजा'' कह के गाल (गाली) इक कड्डी,

        कुंडा खोलया जो माँ ने, सामणे बुत्त जेहा खड़ा, 

        लै के बूहे दा सहारा, ओहदा पुत्त सीगा खड़ा।  

नशे दा सी भार, खड़ा होया नी सी जा रिहा, 

ओहनू वेख सबना दा, रोणा सीगा आ रिहा, 

अक्खां खुली-बंद जेही, पैर धरती सी लब्ब (ढूंढ) रहे,  

कदे उट्ठे कदे डिग्गे, बेबे-बापू ओहनू चक रहे।   

        औखा-सौखा होके, ठाके मंजे उत्ते पाया सी, 

        एह की कित्ता कहके, बापू छाती नाल लाया सी,

        की कमी रही दस्स , दित्ता जो सी तेनु चाहीदा,

        अग्गों कहंदा चल बुढ़या, ना दिमाग मेरा खाई जा। 

सुण पुत्त दा जवाब, बापू चुप-चाप हो गया।  

ऐसा दिन क्यों है आया, मैथों (मुझसे) की पाप हो गया, 

जिसने 'जी' तों बगैर, कदे बापू नूँ  बुलाया ना, 

एह होर कोई जापे, पुत्त मेरा मुड़ आया ना। 

        माँ अमड़ी विचारी, सहमी खुंजे विच खड़ी सी, 

        वेख पुत्त दा एह हाल, लाई हंजुआ दी झड़ी सी, 

        जिऊंदी मरयां जी होई, इक्क सार बस तक्की जावे, 

        ओहदे विच्चों पहलां वाला, पुत्त ओह लब्बी जावे। 

वड्डी भैण ते वी हत्थ ठाता, होए नशे विच अन्ने (अंधे) ने, 

टुट्टे रखड़ी दे तार, जो गुट्ट (कलाई) उत्ते बन्ने ने,  

निक्की भैण पुछे दीदी, अज्ज वीरे नूँ की हो गया,

वड्डी रोवे हाये निक्किये नी, वीर साड्डा किते खो गया।  

        दारू, अफीम ते स्मैक, मिल फेर दाव ला गए, 

        एह चिट्टे, एह टिक्के, साले इक होर पुत्त खा गए, 

        इक होर वीर खा गए.... 

        इक्क होर गबरू नूँ खा गए....  

 

- संदीप सिंह -


Punjabi Version

ਬੜਾ ਹੋ ਗਿਆ ਕੁਵੇਲਾ, ਹਲੇ ਘਰ ਨਹੀਓ ਆਯਾ, 

ਮਾੜੇ ਆਉਂਦੇ ਨੇ ਖਿਆਲ, ਜਾਂਦਾ ਦਿਲ ਘਬਰਾਇਆ, 

ਬੈਠਾ ਪੂਰਾ ਪਰਿਵਾਰ, ਓਹਦੀ ਡੀਕ ਕਰੀ ਜਾਵੇ, 

ਕਿੱਥੇ-ਕਿਵੇਂ ਹੋਣਾ ਪਲ-ਪਲ ਸੋਚ ਮਰੀ ਜਾਵੇ,


ਬੂਹਾ ਪਿੱਟਿਆ ਕਿਸੇ ਨੇ, ਬਾਹਰੋਂ ਆਵਾਜ਼ ਇਕ ਛੱਡੀ,

'ਓ ਕੋਈ ਖੋਲੋ ਦਰਵਾਜਾ', ਕਹਿਕੇ ਗਾਲ ਇਕ ਕੱਢੀ,

ਬੂਹਾ ਖੋਲਿਆ ਜੋ ਮਾਂ ਨੇ ਸਾਮਣੇ ਬੁੱਤ ਜਿਹਾ ਖੜਾ, 

ਲੈਕੇ ਕੰਧ ਦਾ ਸਹਾਰਾ ਓਹਦਾ ਪੁੱਤ ਸੀਗਾ ਖੜਾ, 


ਨਸ਼ੇ ਦਾ ਸੀ ਭਾਰ ਖੜਾ ਹੋਇਆ ਨੀ ਸੀ ਜਾ ਰਿਹਾ, 

ਦੇਖ ਦੇਖ ਸਾਰੀਆਂ ਦਾ ਰੋਣਾ ਸੀਗਾ ਆ ਰਿਹਾ, 

ਅੱਖਾਂ ਖੁਲੀ-ਬੰਦ ਜਿਹੀ ਪੈਰ ਧਰਤੀ ਸੀ ਲੱਭ ਰਹੇ, 

ਕਦੇ ਡਿੱਗੇ ਕਦੇ ਉੱਠੇ, ਬੇਬੇ-ਬਾਪੂ ਓਹਨੂੰ ਚੱਕ ਰਹੇ,

 

ਔਖਾ-ਸੌਖਾ ਹੋਕੇ,  ਮੰਜੇ ਉੱਤੇ ਪਾਇਆ ਬਾਪੂ ਨੇ, 

ਭੁੱਬਾਂ ਮਾਰ ਰੋਇਆ, ਹਿੱਕ ਨਾਲ ਲਾਇਆ ਬਾਪੂ ਨੇ, 

ਪੁੱਛੇ ਕਿ ਸੀ ਕਮੀ ਰਹੀ, ਦਿੱਤਾ ਜੋ ਸੀ ਤੈਨੂੰ ਚਾਹੀਦਾ, 

ਅੱਗੋਂ ਕਹੇ, ਹੱਟ ਬੁੱਡਯਾ! ਨਾ ਦਿਮਾਗ ਮੇਰਾ ਖਾਈ ਜਾ,

 

ਸੁਣ ਪੁੱਤ ਜਵਾਬ, ਬਾਪੂ ਚੁੱਪ-ਚਾਪ ਹੋ ਗਿਆ, 

ਐਸੀ ਘੜੀ ਕਿਉਂ ਹੈ ਆਈ, ਮੈਥੋਂ ਕਿ ਪਾਪ ਹੋ ਗਿਆ, 

ਜਿਹਨੇ ਜੀ ਤੋਂ ਬਗੈਰ, ਕਦੇ ਬਾਪੂ ਨੂੰ ਬੁਲਾਇਆ ਨਾ,

ਇਹ ਹੋਰ ਕੋਈ ਜਾਪੇ, ਪੁੱਤ ਮੇਰਾ ਮੁੜ ਆਇਆ ਨਾ, 


ਮਾਂ ਅਮੜੀ ਵਿਚਾਰੀ, ਸਹਮੀ ਖੂੰਜੇ ਵਿਚ ਖੜੀ ਸੀ, 

ਵੇਖ ਪੁੱਤ ਦਾ ਇਹ ਹਾਲ, ਲਾਈ ਹੰਝੂਆਂ ਨੇ ਝੜੀ ਸੀ, 

ਝੱਲੀ ਕਮਲੀ ਜੀ ਹੋਕੇ, ਇੱਕੋ ਸਾਰ ਓਹਨੂੰ ਤੱਕੀ ਜਾਵੇ, 

ਓਹਦੇ ਵਿਚੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਵਾਲਾ ਪੁੱਤ ਉਹ ਲੱਭੀ ਜਾਵੇ,

 

ਵੱਡੀ ਭੈਣ ਤੇ ਵੀ ਹੱਥ ਠਾਤਾ, ਹੋਏ ਨਸ਼ੇ ਵਿਚ ਅੰਨ੍ਹੇ ਨੇ, 

ਟੁੱਟੇ ਰੱਖੜੀ ਦੇ ਤਾਰ, ਜਿਹੜੇ ਗੁੱਟ ਉੱਤੇ ਬੰਨ੍ਹੇ ਨੇ, 

ਨਿੱਕੀ ਪੁੱਛੇ ਵੱਡੀ ਭੈਣੇ! ਅੱਜ ਵੀਰੇ ਨੂੰ ਕਿ ਹੋ ਗਿਆ, 

ਵੱਡੀ ਰੋਵੇ ਹਾਏ ਨਿੱਕੀਏ ਨੀ! ਵੀਰ ਸਾਡਾ ਕਿਤੇ ਖੋ ਗਿਆ,


ਭੁੱਕੀ, ਫੀਮ ਤੇ ਸਮੈਕ ਅੱਜ ਫੇਰ ਦਾਅ ਲਾ ਗਏ, 

ਇਹ ਚਿੱਟੇ, ਇਹ ਟੀਕੇ ਇੱਕ ਹੋਰ ਪੁੱਤ ਖਾ ਗਏ, 

ਇੱਕ ਹੋਰ ਵੀਰ ਖਾ ਗਏ, ਇੱਕ ਗੱਬਰੂ ਨੂੰ ਖਾ ਗਏ....


-ਸੰਦੀਪ ਸਿੰਘ-


Comments

  1. Beautiful poem and also reality,.........

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  2. Haaye kya baat hai 👏👏👏👏 speachless👌🏼👌🏼👌🏼👍👍👍

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  3. Kya baat h sir, very nice and very true.

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  4. Excellent....the pain the family of drug addicts suffer is unbearable

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  5. A very well written poem on stark and painful reality .

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  6. सच्चाई . .. बहुत बहुत बढ़िया.. . 🎉🎉

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  7. Awesome,
    Speechless poetry 👍

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  8. Good one.story puri kar

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  9. Pher munda da kya banya.story puri kar

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    1. Story puri aa g... End ch likhya Ik hor putt kha gye... Means he died

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  10. Very emotional,🙏

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  11. Apt... Wonderful piece of writing...

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  12. Very touching , wonderfully expressed .👌

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  13. Mind blowing lines 👌🏻👌🏻👌🏻👌🏻

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  14. Ultimate Bhai. Kai kitaabe publish honi chahiye bhai.

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  15. आत २२ आत

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  16. Excellent very well said

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  17. ਦਿਲ ਨੂੰ ਛੂਹ ਜਾਣ ਵਾਲੀਆਂ ਸਤਰਾਂ, ਬਹੁਤ ਵਧੀਆ ,

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  18. बहुत बहुत शुक्रिया सबके प्यार का

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