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दुआ





ऐ ख़ुदा तेरी  रहमतों का कुछ ऐसा अंदाज़ रहे 
मेरे दिल में हो फ़कीरी, बेशक़ सर पे ताज़ रहे 

मुश्किलों से लड़ूं तुम बाज़ुओ को शेर कर दो 
नज़र मंज़िल से न हटे इन आँखों में बाज़ रहे

आने वाला कल भी, परसों बीता कल हो जायेगा 
जी लूँ  जी भर ज़िंदगी जब तलक ये आज रहे

कटे जुबाँ जो मेरे बोल दुखाएँ दिल किसी का
मगर हक में सदा सबसे ऊँची मेरी आवाज़ रहे

दुनिया लाख हो रुसवा मुझे परवाह नहीं कोई
बस मेरे माँ-बाप ना कभी मुझसे नाराज़ रहे

मिट्टी में दबूँ किसी के एहसान में दबने से पहले
किसी बंदे का नहीं 'संदीप' सिर्फ तेरा मोहताज़ रहे 

- संदीप सिंह -

Comments

  1. Very nice 👍👍👍

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  2. Very nice 👏👏

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  3. Bahut badhiya sir

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  4. Gazab👌🏼👌🏼👍👍

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  5. Very nice Sir👍keep up the good work 👍

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  6. wonderful, some writing are just touched your heart and brings tears in eyes n happiness in heart with smile on face, because they are blessed , yours is one of them blessed writing.

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  7. Vadiya khud likhya kya

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  8. Bahut Khoob.... Mitthu

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  9. Wonderful veer ji

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  10. Wah!! Very nice
    Keep writing

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  11. Great Sandeep . Keep it up.well done

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Thank you for support... Keep sharing🙏🙏

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सब्र रखने का दम गरीब में बेहिसाब देखा है मैंने, पैसे वाले की नीयत को होते खराब देखा है मैंने, माना औकात छोटी है, जितना हो सके काम आया हूं, औकात वालों के मुंह पे तो साफ जवाब देखा है मैंने। सिर्फ मंगल, वीर को छूने से पाप लगता है जिनको, बाकी पाँचो दिन उनके हाथों में शराब देखा है मैंने। बालों में सजा था किसी के जो ताज बन कर कभी, पत्ती पत्ती बिखरा वो सूखा गुलाब देखा है मैंने। बुजुर्गों से कसीदे सुनते आये जिस गुलसिताँ के बारे, टुकड़े टुकड़े होते वो देश पंजाब देखा है मैंने। जंग सिर्फ मैदान में नहीं कागज़ पर भी लड़ी जाती है,  कलम को तलवार, ढाल बनते किताब देखा है मैंने। तानाशाह सरकार घुटने टेकने को मजबूर हुई आखिर वजूद की खातिर किसानों का ऐसा इंकलाब देखा है मैंने। कुछ ऐसा लिख दे संदीप जो दिलों पे छाप छोड़ दे,    मुकम्मल हो खुदा जो ये ख्वाब देखा है मैंने। –संदीप सिंह–

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