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बचपन का इतवार




सुकून वो पहले जैसा अब कहीं भी मेरे यार नहीं है 
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है
एक गीत सुनने को आज Channel हजार हैं लेकिन 
कमी सी खलती है कि वो "रंगोली", "चित्रहार" नहीं है 
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है...


गलियां सूनी पड़ जाती, 9 बजते वक्त सा थम जाता
चंद्रकांता देखने हर कोई टीवी के आगे जम जाता
एक तरफ था बलू, बघीरा, उधर ताबाकी शेर खान 
चड्डी पहन के फूल खिला था वो मोगली सबकी जान
Tom & Jerry, Duck Tales, Micky Mouse 
बड़ा ही प्यार था
इन सबने मिलकर तब मेरा बचपन खूब संवारा था
अलिफ लैला की कहानियों में हम सब कहीं खो जाते
बेताल भूत को पकड़े विक्रम देख खड़े रोंगटे हो जाते 
पहले जैसे इतने प्यारे अब यादगार किरदार नहीं है
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है
 
एक ख़बर को चीख चीख, ना पूरा दिन घुमाते थे
15 मिनट नजा़कत से तब ''समाचार'' सुनाते थे
टी.वी जिसके घर होता वहाँ दौडे़ भागे जाते थे
दूरदर्शन पर चक्रधारी जब ''श्री कृष्ण'' आते थे 
''रामायण'' और ''महाभारत'' जैसे अब संस्कार नहीं है 
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है

बैठे होते School में, पर Sunday पर ही ध्यान जाता था 
जुबाँ पे एक ही गीत ''शक्ति शक्ति शक्तिमान'' आता था
''अँधेरा कायम रहे'' कहता हुआ ''किलविश'' डराता था 
जैकॉल, कपाला से गीता को अपना हीरो बचाता था  
कुछ भी कहो शक्तिमान के जैसा कोई Superstar नहीं है  
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है

गिल्ली-डंडा, पकड़ा पकड़ी और आँख मिचौलियाँ 
चोर सिपाही में मुँह से बजाते धांय-धांय  गोलियाँ 
क्रिकेट खेलने इकट्ठी होती थी यारों की टोलियाँ 
गुड्डे गुड्डी की शादी, वो मस्ती, हँसी-ठिठोलियाँ
सच कहुँ उन दिनों सा अब कोई त्यौहार नहीं है 
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है

छिन गया बचपन, जबसे जिम्मेदार हो गए हम 
मासूमियत गई, कहने को समझदार हो गए हम
लाखों कमाकर बेशक सेठ-साहुकार हो गए हम
मगर जिन्दगी भर को ए बचपन तेरे कर्जदार हो गए हम
अब वो बेफिक्री की नींद, रातों का क़रार नहीं है
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है
Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है...

- संदीप सिंह-







 

Comments

  1. एकदम! सब कह दिया आपने

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  2. Arey, wah!!👌👌👌👌chhupe rustum nikle aap to.
    Such mein , bachpan vala itvar to milna ab namumkin hai
    Well expressed

    ReplyDelete
  3. Je baat Sandeep Bhai cha ge tusi tan ye poem is near to my 💜

    ReplyDelete
  4. How true... Excellent mitthu .... Monty bai

    ReplyDelete
  5. Excellent poem . So true .
    Made me nostalgic. Sandeep you are so talented. Well done.

    ReplyDelete
  6. आपकी लेखन कला दिनों दिन अत्यधिक प्रखर और प्रभावी होती जा रही है......
    सन्दीप भाई आपको कोटि कोटि शुभकामनाएँ.....

    ReplyDelete
  7. Each and every word is perfect. Really so many treasures we have lost with the passage of time.

    ReplyDelete
    Replies
    1. Thank u Manika Mam... Need ur support as well as blessings also...

      Delete
  8. Ohho...sandeep Bhai kya baat ..mja aa gya

    ReplyDelete
  9. Bahut badhiya Sandeep gi

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