Skip to main content

Posts

दुआ

ऐ ख़ुदा तेरी  रहमतों का कुछ ऐसा अंदाज़ रहे  मेरे दिल में हो फ़कीरी, बेशक़ सर पे ताज़ रहे  मुश्किलों से लड़ूं तुम बाज़ुओ को शेर कर दो  नज़र मंज़िल से न हटे इन आँखों में बाज़ रहे आने वाला कल भी, परसों बीता कल हो जायेगा  जी लूँ  जी भर ज़िंदगी जब तलक ये आज रहे कटे जुबाँ जो मेरे बोल दुखाएँ दिल किसी का मगर हक में सदा सबसे ऊँची मेरी आवाज़ रहे दुनिया लाख हो रुसवा मुझे परवाह नहीं कोई बस मेरे माँ-बाप ना कभी मुझसे नाराज़ रहे मिट्टी में दबूँ किसी के एहसान में दबने से पहले किसी बंदे का नहीं 'संदीप' सिर्फ तेरा मोहताज़ रहे  - संदीप सिंह -

बचपन का इतवार

सुकून वो पहले जैसा अब कहीं भी मेरे यार नहीं है  Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है एक गीत सुनने को आज Channel हजार हैं लेकिन  कमी सी खलती है कि वो "रंगोली", "चित्रहार" नहीं है  Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है... गलियां सूनी पड़ जाती, 9 बजते वक्त सा थम जाता चंद्रकांता देखने हर कोई टीवी के आगे जम जाता एक तरफ था बलू, बघीरा, उधर ताबाकी शेर खान  चड्डी पहन के फूल खिला था वो मोगली सबकी जान Tom & Jerry, Duck Tales, Micky Mouse  बड़ा ही प्यार था इन सबने मिलकर तब मेरा बचपन खूब संवारा था अलिफ लैला की कहानियों में हम सब कहीं खो जाते बेताल भूत को पकड़े विक्रम देख खड़े रोंगटे हो जाते  पहले जैसे इतने प्यारे अब यादगार किरदार नहीं है Sunday तो है पर मेरे बचपन का वो इतवार नहीं है   एक ख़बर को चीख चीख, ना पूरा दिन घुमाते थे 15 मिनट नजा़कत से तब ''समाचार'' सुनाते थे टी.वी जिसके घर होता वहाँ दौडे़ भागे जाते थे दूरदर्शन पर चक्रधारी जब ''श्री कृष्ण'' आते थे  ''रामायण'' और ''महाभारत'' जैसे अब संस्क...

कलम से गुफ्तगू

एक रोज़ मैं कलम से गुफ्तगू कर बैठा, दबे दिल के जज़्बात उसके रूबरू कर बैठा।                             मेरा हाल-ए-दिल उसने फिर लफ़्ज़ों को सुना दिया,                     करके कानाफूसी उनसे एक अफसाना बना दिया। और फिर आवाज़ देकर के कागज को भी पुकारा गया, जज़्बातों से भरे मेरे लफ़्ज़ों को उस पर उतारा गया।                      इतना कुछ हुआ जो लिखने की ज़ुस्तज़ु कर बैठा,                     एक रोज़ मैं कलम से गुफ्तगू कर बैठा... अब सोचता हूँ दबे रह जाते ये एहसासों के मोती,  बयाँ होता ना बहुत कुछ अगर ये पास ना होती।                    बात बढ़ती गई और अब तो जैसे यारी सी हो गई,            ...

10 दात्तां - Ten Blessings (Punjabi)

Hindi Version: देणा दे सकदा नहीं रब्बा, तेरी दित्ती होइयाँ दात्तां दा, मेरी सोच तों वड्डी दात तेरी, बड़ा छोटा मैं औकातां दा,  मेरी कलम चों लफ्ज़  वी मुक्क चल्ले, लग्गा  जिक्र करण सौगातां दा, अज्ज कोशिश है एह छोटी जई, दिल भरया मेरा जज़्बातां दा।  मेरा बापू पहली दात तेरी, जिहने तेरे वांग ही प्यार दित्ता, हड्ड साड़, लहू निचोड़ अपणा, मेरे सुपनयां नूं आकार दित्ता,  दुज्जी दात है मेरी माँ अमड़ी, जिहने धर्म कर्म संस्कार दित्ता,  मैंनू हसदा वसदा वेखन लई, अपणी सब खुशियां नूं वार दित्ता।  तिज्जी दात च  मिलया वीर वड्डा, जो नाल मेरे जिवें सज्जी बांह, इक पैण (बहन) है चौथी दात तेरी, मेरे लई जिवें ओह दुज्जी माँ, मेरे यार प्यारे दात पंजवी, तप्दी धरती लई ज्यों संगणी छां, मुँह रोज़ी ला, कम्म कार दित्ता, एह छेवीं दात जिथे किरत करां। किवें सत्त्वीं दात दा मुल्ल देवां, दुःख-सुख दा हाणी मिलाया तूँ, अट्ठवीं ते नौवीं दात दे विच, ती (बेटी) ते पुत्तर झोली पाया तूँ , दसवीं दात है तेरा नाम सच्चा, एह सच मैनु समझाया तूँ , एन्ना कुज बक्श निमाणे नूं, 10 दात्तां दा मालक बणाया तूँ। ...