ऐ ख़ुदा तेरी रहमतों का कुछ ऐसा अंदाज़ रहे मेरे दिल में हो फ़कीरी, बेशक़ सर पे ताज़ रहे मुश्किलों से लड़ूं तुम बाज़ुओ को शेर कर दो नज़र मंज़िल से न हटे इन आँखों में बाज़ रहे आने वाला कल भी, परसों बीता कल हो जायेगा जी लूँ जी भर ज़िंदगी जब तलक ये आज रहे कटे जुबाँ जो मेरे बोल दुखाएँ दिल किसी का मगर हक में सदा सबसे ऊँची मेरी आवाज़ रहे दुनिया लाख हो रुसवा मुझे परवाह नहीं कोई बस मेरे माँ-बाप ना कभी मुझसे नाराज़ रहे मिट्टी में दबूँ किसी के एहसान में दबने से पहले किसी बंदे का नहीं 'संदीप' सिर्फ तेरा मोहताज़ रहे - संदीप सिंह -